इस आर्टिकल मे हम जानेंगे एक खौफनाक तालाब (lake) के (Monster) कि कहानी।
{Main Characters of the story - (i) Shyam (ii) Rockey}
Devil of the mysterious lake - Chapter - 2
Disclaimer -
This story does not contain any real place, person. This story is just for entertainment purpose.
Main story ( To be continued...)
तो श्याम के गांव मे उसका दोस्त Rockey आया है घूमने। अगले दिन श्याम Rockey से पूछता है की क्या तुम रात को खतरनाक खर्राटे लेकर सो रहे थे। इसके जवाब में रॉकी श्याम से बोलता है कि मे रात को शांति से सो रहा था, रॉकी ने कहा - भाई मैं खर्राटे लेकर नहीं सोता, क्योंकि मुझे सर्दी है मेरा गला बहुत खिच खिच करता है। अब श्याम सोचने लगा अगर रॉकी खर्राटे नही ले रहा था, तो फिर मुझे जो आवाज सुनाई थी वह किस चीज आवाज थी ?
Both of them Visited Again on that lake -
दोनों मित्र मिलकर एक बार फिर उसी तालाब मैं जाते है, पर इस बार कुछ अलग होता है !
ऐसा संभव है कि नहीं परंतु पता नहीं कैसे वह लोग जाते तो है उधर पर अचानक उनको ऐसा लगता है कि दोपहर के 2:00 वजहें से तुरंत रात के 12:00 बज जाते हैं। पता नहीं कैसे रॉकी को लगता है कि उसके पैरों में पानी लग रहा है (वह होता है ना कि जव आप समुंद्र मे या तालाब मे अपने पेर रखे और कैसा लगता है ना) इस प्रकार रॉकी को ऐसा आभास लगता है जब उसके पैर मिट्टी मे ही है। रॉकी कुछ समझ पाता उससे पहले श्याम उसे देख देख के उल्टे पैर तालाब के अंदर जा रहा था, रॉकी की इतनी बुरी तरह फटती है उसने आओ - दिखा - ना - ताउ , रॉकी इतनी तेजी से दौड़ लगाता है कि उसने जिंदगी में कभी भी ऐसी दोर नही लगाई वह सीधा भागा और एक साधु के चरणों मे जाकर पड़ गया, साधु ने पूछा - ‘ बालक इस प्रकार तुम क्यों हॉफ्ते हॉफ्ते भाग रहे थे ’ रॉकी ने साधू महाराज जी को शुरू से लेकर अब तक जो कुछ भी हुआ उसके और उसके मित्र श्याम के साथ वह सब कुछ उसने बताया। उसकी बातें सुनकर साधु महाराज ने कहा ‘मैं तुम्हारी मदद कर सकता हू ’। उनकी बातें सुनकर रॉकी उनको अपने साथ उसी तालाब के पास ले गया। साधु महाराज ने थोड़ी देर तक चुप रहकर रॉकी को इशारा किया और कहा कि वह देखो उस पैर के जरो के पास तुम्हारा मित्र श्याम बेहोश होकर पड़ा हुआ है। उन महाराज जी ने कहा शुक्र मनाओ तुम्हारा मित्र केवल बेहोश गया है, वह जो तालाब का पिशाच है तुम दोनों पर इतना ज्यादा क्रोधित नही हए क्योंकि तुम दोनो ने कुछ गलत किया ही नही है, और जो लोग जानबूझ कर इस तालाब मे आकर मल-मूत्र करके जते है उनको तो मैं भी नहीं बचा सकता। और फिर उन्हें महाराज जी ने श्याम और रॉकी को हाथ में बांधने के लिए धागे दीए, और उनसे कहा कम से कम चार - हफ्ते तक इन धागो को मत उतारना। उसके बाद दोनों दोस्तों ने महाराज जी के पैर छुए और प्रणाम कहकर अपने-अपने घर लौट आए।
Conclusion :
This is not a real life story. This story is created just for entertainment. This story does not contain any real place, person or anything else.



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